भारत में FASTag सिस्टम हो जायेगा खत्म, अब सड़क पर जितने किमी चलाएंगे वाहन उतना लगेगा टोल, जानिए वजह

देशभर में 1 अप्रैल से टोल टैक्स बढ़ा दिया गया है जिसका खामियाजा अब वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है, लेकिन इसी बीच अब ज्यादा टोल चुका रहे वाहन चालकों को बहुत जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। दरअसल सरकार के द्वारा फास्ट एक्ट को खत्म कर टोल कलेक्शन का नया सिस्टम लाने की तैयारी में लगी है। ऐसे में जल्दी ही अब वाहन चालकों को ज्यादा टोल से राहत मिल सकती है। इसमें अब नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर कार जितनी किलोमीटर चलेगी उसके हिसाब से उतना ही टोल टैक्स चुकाना पड़ेगा।

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अब इस सिस्टम से वसूला जायेगा टोल टैक्स

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक वाहन चालकों से फास्ट ट्रेक के माध्यम से टोल टैक्स लिया जाता है, लेकिन अब वाहन चालकों को टोल टैक्स में राहत देने के लिए सरकार की तरफ से तैयारी की जा रही है। जिसमें वाहनों में अब सेटेलाइट नेवीगेशन सिस्टम लगाया जाएगा इस नए सिस्टम में आप हाईवे पर कितने किलोमीटर वाहन को चलाएंगे उतना ही टोल वसूला जाएगा। अभी तक देखा जाता है कि आप भले ही वहां नहीं जा रहे हो और आपकी यात्रा बीच में ही कहीं खत्म हो रही हो, लेकिन टोल का पूरा भुगतान आपको करना पड़ता है, लेकिन अब केंद्र सरकार सेटेलाइट नेवीगेशन सिस्टम से टोल टैक्स वसूलने जा रही है।

इन देशों के बाद भारत में अपनाई प्रणाली

केंद्र सरकार के द्वारा इस प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और इस सिस्टम में वाहन द्वारा हाईवे पर कितने किलोमीटर का सफर तय किया जाएगा उसके हिसाब से टोल टैक्स व्यक्ति के खाते से कट जाएगा ।वहीं जर्मनी और रूस जैसे यूरोपीय देशों में इस सिस्टम के जरिए टोल वसूला जा रहा है। इन देशों में इस प्रणाली की सफलता को देखते हुए अब जल्द ही भारत ने भी इसे लागू करने की तैयारी की जा रही है।

विशेषज्ञों के द्वारा चल रहा है अध्ययन

अगर जर्मनी की बात करें तो यहां पर अभी सभी वाहनों में 98.8 प्रतिशत में उपग्रह नेविगेशन सिस्टम स्थापित किया गया है। वाहन के टोल रोड में प्रवेश करते ही टोल की गणना शुरू हो जाती है। वहीं जितना वाहन चलाते हैं उसके हिसाब से वाहन चालक का टोल उनके खाते से कट जाता है। हालांकि यह प्रणाली फास्ट एक की तरह ही है। फिलहाल भारत में वाहनों पर फास्ट्रेक स्टोर लिया जा रहा है, लेकिन अब इसमें नया बदलाव किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट में देश भर में 1.37 लाख वाहनों को शामिल किया गया है। वहीं विशेषज्ञों द्वारा इस पर अध्ययन चल रहा है जल्दी इसकी रिपोर्ट कुछ हफ्तों में जारी कर दी जायेगी।

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