अब देश में नहीं मंडरायेगा बिजली का संकट, जमीन के अंदर मौजूद गर्मी से होगा बिजली का उत्पादन, जानिए कहां

देश में इस समय बिजली पानी, कोयले और यहां तक की कचरे से बनाई जा रही है, लेकिन अब बहुत जल्द जमीन के अंदर की गर्मी से बिजली का उत्पादन किया जाएगा। दरअसल इस बात को सोचकर आप हैरान जरूर है, लेकिन यह 100 टका सच है। राजस्थान के थार में जमीन की भीतरी गर्मी भी अब हमारे लिए इस्तेमाल करने लायक होगी। जी हां जमीन के अंदर हजारों मीटर गहराई में प्राकृतिक रूप से मौजूद उस्मा का इस्तेमाल जियो थर्मल एनर्जी की सहायता से बिजली उत्पादन करने में किया जाएगा। अगर ऐसा किया जाता है तो देश में कहीं भी बिजली का संकट उत्पन्न नहीं होगा और लोगों को भरपूर बिजली मिलेगी।

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ये कंपनी अब गर्मी से उत्पादन करेगी बिजली

दरअसल अब जमीन के अंदर हजारों मीटर गहराई में प्राकृतिक रूप से मौजूद उस्मा का उपयोग कर जियोथर्मल एनर्जी की सहायता से बिजली का उत्पादन किया जाएगा और इसका अनुबंध केयर्न ऑयल एंड गैस ने एनर्जी टेक्नोलॉजी कंपनी बेकर ह्यूजेस के साथ किया है। बता दें कि यह कंपनी बाड़मेर जिले में तेल और गैस की खोज कर रही है। कंपनी के तेल और गैस के कुआं से जियो थर्मल एनर्जी को काम में लिया जाएगा। इससे केयर ऑयल एंड गैस तेल और गैस के साथ 2.4 मेगावाट तक की बिजली का सहा उत्पादन करेगी। जिससे हर साल 17000 टन ग्रीन हाउस गैस से छुटकारा मिलेगा।

भारत की हरित ऊर्जा में मिलेगा योगदान

इस मामले में केयर्न ऑयल एंड गैस ने एनर्जी टेक्नोलॉजी कंपनी के डिप्टी सीईओ प्रचुर शाह ने बताया कि चयन में भारत में घरेलू ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए इन क्रियाकलापों पर काम किया जा रहा है। बेकर ह्यूजेस के साथ जुड़ने से सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकी का भारत की हरित ऊर्जा में योगदान मिलेगा ।उनका कहना है कि दुनिया में तेल के कुएं लगातार सूखते जा रहे हैं। ऐसे में जियो थर्मल एनर्जी के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अभियान शुरू किया गया है। सर्वश्रेष्ठ वैश्विक पद्धतिया लाने और ऊर्जा आत्मनिर्भर की दिशा में देश के इस सफर में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

2050 तक हो जायेगा काम

बांग्लादेश के डायरेक्टर नीरज सेठी ने बताया कि केयर्न वेदांता का अधिकार हुुजेंस के साथ मजबूत रिश्ता होने की वजह से 2050 तक उत्सर्जन बनने की क्रिया की यात्रा में उनके साथ काम करने के लेखक उत्साहित है। उनका कहना है कि उच्च तापमान में खोजे गए तेल और गैस के मौजूदा को की रिपपर्जिंग के लिए व्यवहारिकता का संयुक्त अध्ययन किया जाएगा। जिससे कि जियो थर्मल एनर्जी उत्पन्न हो सके।

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बता दें कि इस परियोजना की व्यवहारिकता के अध्ययन का पहला चरण परियोजना शुरू होने के बाद 4 माह में किया जाएगा। इस साल फरवरी में चयन ऑयल एंड गैस की ओर से घोषित एसजी रोड मैप के बाद हुआ है। 2030 तक डिजिटल शिक्षा कार्यक्रमों द्वारा करीब 9 मिलियन विद्यार्थियों की शिक्षा और स्वास्थ्य रक्षा शिक्षा कोष एवं कल्याण के माध्यम से 20 महिलाओं और बच्चों का उत्थान शामिल है।