माता-पिता का सिर से उठा साया, तो दादा-दादी ने चाय बेचकर पढ़ाया, आज उसी बच्चे ने किया जिले में टॉप

इस समय कई बच्चे हैं जो अपने करियर को संवारने में लगे हैं। वैसे अपने जीवन में सही करियर की शुरुआत तो हाई स्कूल के बाद से हो जाती है। 10वीं 12वीं में बच्चे अच्छे परिणाम लाकर एक अच्छी सफलता हासिल करते हैं। इसके साथ ही यहां से तय कर लेते हैं कि उन्हें जीवन में आगे क्या बनना है। ऐसे में कई युवा होते हैं जो अपनी मेहनत के बलबूते एक बड़ा मुकाम हासिल कर लेते हैं। कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनके पास पढ़ने लिखने के पैसे तक नहीं होते, लेकिन संघर्ष करते हुए इस मुकाम को हासिल कर ही लेते हैं।

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10वी-12वीं में कई बच्चों ने किया टॉप

दरअसल हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़ लिखकर अच्छी नौकरी करें। ऐसे में कई माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाते और कई ऐसे होते हैं जो मेहनत कर अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर बड़ा आदमी बना देते हैं। कुछ बच्चे भी ऐसे होते हैं जो माता पिता के पास अगर पढ़ाने के पैसे नहीं हैं तो वहां खुद मेहनत कर इतने काबिल बन जाते हैं कि अपनी पढ़ाई की फीस भर सकें। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश के बच्चे की कहानी बताने जा रहे हैं जो काफी दिलचस्प है। उत्तर प्रदेश में 12वीं और 10वीं का रिजल्ट घोषित किया गया है जिसमें कई युवाओं ने टॉप किया है।

10वीं में टॉप कर दादा-दादी का नाम किया रोशन

इसी तरह उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में रहने वाले एक अनाथ बच्चे ने ऐसी मिसाल पेश की है जिसे देखकर हर कोई हैरान है। अपने पोते की इस सफलता को देखने के बाद दादा दादी अपने आंसू नहीं रोक पाए। दरअसल उज्जवल गुप्ता जो कि अपने दादा दादी के साथ हमीरपुर में रहते हैं। उन्होंने दसवीं की परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया है। इसके बाद कॉलेज एसबी इंटर में पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने जिले में टॉप करके अपने दादा-दादी का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

चाय बेचकर दादा-दादी ने पढ़ाया

दरअसल उज्जवल के पिता रामचंद्र गुप्ता थे। जिनका निधन 2010 में कैंसर की बीमारी के चलते हो गया था। जिसके बाद वहां अपनी मां के सहारे रहने लगे, लेकिन भगवान को यह भी मंजूर नहीं था और उनकी मां का भी स्वर्गवास हो गया था। 2003 में उज्जवल की मां रामा जी का देहांत हो गया इसके बाद वहां पूरी तरह से अनाथ हो गए थे, लेकिन उनके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी। ऐसे में उनके दादा दादी ने उसे चाय की दुकान पर चाय बेचकर अच्छे से परवरिश करने के साथ पढ़ाई लिखाई कराई। उज्जवल की एक छोटी बहन भी है वहां भी अपने दादा दादी के साथ रहती है। उज्जवल की इस सफलता के पीछे उनके दादा-दादी का हाथ है।

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