बीमा राशि के नाम पर किसानों से छलावा, वादे से मुकरी शिवराज सरकार, 7 हजार की जगह मिले इतने रुपये

मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने बीते दिनों 2020-21 में अतिवृष्टि से बर्बाद हुई रवि और खरीफ की फसलों की बीमा राशि किसानों के खाते में ट्रांसफर की थी। जिसमें करीब एक लाख 86 हजार किसानों को लाभ पहुंचा था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक क्लिक पर किसानों के खाते में 7600 करोड रुपए ट्रांसफर किए थे, लेकिन मध्य प्रदेश के किसान इस बीमा राशि से ना खुश नजर आ रहे है। इसकी वजह है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जो वादा किया था उस वादे से मुकर गए है। दरअसल किसानों को बीमा राशि में 7000 मिलना था, लेकिन उन्हें 400 से 500 दिए गए। इसके बाद मध्य प्रदेश के किसानों में आक्रोश देखा जा रहा है।

किसानों को खांतों में मिले 400 से 500 रुपये

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते दिनों बैतूल जिले में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में एक क्लिक पर प्रदेश भर के किसानों के खातों में बीमा राशि ट्रांसफर की थी, लेकिन किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा के प्रीमियम 7000 तय किए थे, लेकिन उन्हें महज 400 से 500 रुपये ही खाते में मिले है। वहीं बीमा राशि को लेकर किसानों से कई वादे किए थे लेकिन उन वादों से यह मुकर गए है।

अधिकारी और जनप्रतिनिधियों के वादे हुए खोखले साबित

दरअसल हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की जहां पर किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा के प्रीमियम 7000 तय की गई थी लेकिन उन किसानों को महज 400 से 500 रुपये खाते में ट्रांसफर किए गए जबकि इससे पूर्व अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने मंच से घोषणा की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि एक लाख 46456 किसानों के खाते में 172 करोड रुपए ट्रांसफर हुए हैं। साथ ही कार्यक्रम में 5 किसानों को फसल क्षतिपूर्ति के चेक भी सांस्कृतिक रूप से बांटे गए थे, बाकी किसानों को यह कहा गया था कि उनके खाते में राशि आ जाएगी लेकिन दो-तीन दिन बाद भी किसानों के खाते में फसल की राशि नहीं आई इसके बाद जब किसानों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंन 1 सप्ताह का समय मांगा है।

किसानों ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

किसानों को तय की गई प्रीमियम राशि नहीं मिलने पर आक्रोश देखा जा रहा है। उन्होंने खंडवा जिले के कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। उसके साथ ही उन्होंने मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार पर बीमा के नाम पर छलावा होने का आरोप लगाया है। वहीं भेरूगढ़ के किसान का कहना है कि सोयाबीन की फसल का बीमा कराया गया था ।इस दौरान प्रीमियम 7000 तय की गई थी लेकिन जब यह फसल नष्ट हो गई तो उन्हें 400 मिले है। उनके मोबाइल में मैसेज आया तो उनका मन काफी दुखी हुआ। बहरहाल अब देखना यह होगा कि इन भोलेभाले किसानों की पीड़ा को कौन सुनता है।