गांव में जन्मी और अपनी मेहनत के दम पर IAS बनी मध्यप्रदेश के छोटे से गांव की तपस्या परिहार!

तेजी से बदलते समय के साथ ही पढ़ाई को लेकर भी युवाओं में उत्सुकता देखने में नजर आती है। आज के इस दौर में अधिकांश छात्र सिविल सर्विसेज एग्जाम को लेकर काफी ज्यादा एक्टिव दिखाई दे रहे हैं। आज अधिकांश छात्र UPSC की तैयारी कर IAS बनने के लिए सतत प्रयास कर रहे हैं। लेकिन क्या इतनी बड़ी एग्जाम को बिना किसी के मार्ग दर्शन के निकाला जा सकता है? आज छात्र अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर रहकर इन एग्जाम की तैयारी करते हैं। लेकिन इसके बाद भी सफलता की कोई उम्मीद नहीं होता।

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लेकिन आज हम आपको एक ऐसे सफल विद्यार्थी से रूबरू कराने जा रहे हैं। जिन्होंने गांव में रहकर अपनी मेहनत के चलते UPSC में टॉप कर आज IAS बनने में सफलता हासिल की है। दरअसल, मध्य प्रदेश के एक छोटे से जिले नरसिंहपुर की रहने वाली तपस्या परिहार जिन्होंने वर्ष 2017 में दूसरी कोशिश में UPSC का एग्जाम 23वीं रैंक के साथ पास की थी।

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बता दें कि तपस्या मध्यप्रदेश के एक छोटे गाँव में रहती थी, जहां पढ़ाई के ज्यादा संसाधन भी मौजूद नहीं थे। आज भी हमारे समाज में बेटी को ज्यादा पढ़ाया नहीं जाता है। इस मामले में गांवों की हालत तो और ज्यादा खराब है गांव में बेटी के बड़े होते ही उनकी शादी कर दी जाती है। लेकिन कुछ बेटियां भाग्यशाली होती है जिन्हें पढ़ाई करने का अबसर प्राप्त होता है। इनमे से ही एक नाम था तपस्या का जिकने घर वालों ने उन्हें पढ़ाई करने की इजाजत दी। और पढ़ाई के लिए जिस भी चीज की आवश्यकता थी तपस्या को उपलब्ध कराई।

परिवार वालों का मिला साथ

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तपस्या को पढ़ाई में सफल बनाने के लिए जितनी मेहनत तपस्या ने की उससे कई ज्यादा उनके परिवार वालों ने भी की बता दें कि गांव में रहते हुए भी पढ़ाई में काम आने वाली सभी चीजों को तपस्या को मुहैया कराया ताकि पढ़ाई में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो सके। उन्हें भी अपने बेटी पर पूर्ण विश्वास था कि वे जरूर सफल होंगी। इसलिए परिवार वाले क़दम कदम पर तपस्या को प्रोत्साहित करते थे की वह यूपीएससी के इस मुश्किल एग्जाम को भी पास कर सकती हैं।

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गांव में हुआ जन्म

दरअसल,तपस्या का जन्म 22 नवंबर 1992 मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर के जोवा गाँव में हुआ था। और तपस्या का परिवार किसानी से जुड़ा है उनके पिता किसानी करते हैं। लेकिन गांव में रहकर पढ़ाई करने के बावजूद तपस्या पढ़ाई में बहुत होनहार थी। और उन्होंने 10वीं और 12वीं में अपने स्कूल की टॉपर रहीं हैं। तपस्या की पढ़ाई के प्रति रुचि और मेहनत को देखते हुए उनके परिवार वालों ने तपस्या को UPSC की परीक्षा देनी के लिए प्रोत्साहित किया।

दादी बनी मोटीवेटर

फिर क्या था तपस्या ने भी UPSC एग्जाम को अपना लक्ष्य बना लिया और नेशनल लॉ सोसाइटीज़ लॉ कॉलेज, पुणे से लॉ में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और फिर UPSC की परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली रवाना हो गयीं, बाद में वहीं रह कर पढ़ाई की। तपस्या अपने घर के बच्चों में सबसे बड़ी थी लेकिन फिर भी उन्हें परिवार का पूरा साथ मिला।तपस्या को अपने माता-पिता के साथ अपनी दादी देवकुंवर परिहार का भी बहुत साथ मिला। इतना ही नहीं तपस्या की दादी उनकी सबसे बड़ी मोटीवेटर थीं। वे समय-समय पर तपस्या को प्रेरित करती रहती थी कि तपस्या तुम इस एग्जाम को पास कर सकती हो। जिससे दादी की बातें सुनकर तपस्या के हौसले और दृढ़ हो जाते थे और वह पढ़ने में पहले से ज़्यादा ध्यान देती और पूरी लगन से पढ़ाई करती थीं।

दूसरे प्रयास में मिली सफलता

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उन्होंने दिल्ली में ही रहते हुए लगभग ढाई साल तक इस एग्जाम के लिए तैयारी की। तपस्या ने इस परीक्षा के लिए दो बार प्रयास किया पहली बार तो उन्हें ना कामयाबी मिली और वे प्री परीक्षा भी पास नहीं कर पाईं, लेकिन दूसरे प्रयास में उन्हें सफलता मिल गई और उनका सिलेक्शन हो गया।तपस्या परिहार का मानना है कि UPSC का एग्जाम पास करने के लिए कोचिंग करना ज़रूरी नहीं होता है।

सेल्फ स्टडी करना बहुत आवश्यक

दिए गए एक इंटरव्यू में तपस्या ने बताया कि यूपीएससी के एग्जाम में सफल होने के लिए सेल्फ स्टडी करना बहुत आवश्यक होता है। कोचिंग क्लासेज में कई सारे उम्मीदवार होते हैं इसलिए वहाँ पर अध्यापक हर किसी उम्मीदवार पर ध्यान नहीं दे सकता है। आता है जब आप ख़ुद पर ध्यान देंगे और एकाग्र चित्त होकर पूरे फोकस के साथ परीक्षा की तैयारी अपने बलबूते पर करेंगे तभी आपको सफलता मिलेगी। इतना ही नहीं तपस्या का कहना है कि पहली बार में वह सेलेक्ट नहीं हो पाई थीं, उसकी वज़ह भी कोचिंग ही है।

उनका कहना है कि ‘मैं कोचिंग पर भरोसा करके बैठ गयी थी कि वही सबकुछ कराएंगे और सिखाएंगे, परन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ। कोचिंग क्लासेज में बहुत सारे कैंडीडेट्स होते हैं इसलिए अलग से आप पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है। इससे अच्छा तो यही है कि आप सेल्फ स्टडी ही करें’। तपस्या अपनी कामयाबी के लिए सेल्फ स्टडी कोई मूल मंत्र मानती हैं जिससे उन्होंने वर्ष 2017 में UPSC के एग्जाम में 23 वीं रैंक हासिल की। जब दूसरे प्रतिभागी उनसे उनकी इस कामयाबी के टिप्स मांगते हैं तो वे कहती हैं कि ‘पता नहीं लोग कैसे 14 से 16 घंटे पढ़ लेते हैं, मैंने कभी इतनी पढ़ाई नहीं की। मैं रोज़ के रोज़ अपनी स्ट्रेटजी बनाती थी और उसी के अनुरूप चलती थी। प्री के पहले मैंने 8 से 10 घंटे पढ़ाई की है जो मेन्स के समय 12 घंटे तक पहुँची पर इससे ज़्यादा नहीं’।